
देश में रामचरितमानस के मानने वाले बहुमत में हैं। इसका अनादर सर्वथा अनुचित।
हिन्दू राष्ट्र का प्रारूप अब तक किसी ने सामने न रखा कि ऐसा होगा उसका स्वरूप तो केवल नामकरण कर देने से क्या लाभ ?
~ परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती महाराज ‘1008’


