ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज

एकनजर इधर_भी👇

सनातनी परिवार के आदरणीय सदस्यों ब्रम्हलीन प्रातः स्मरणीय ज्योतिष एवं द्वारकाशारदा द्विपीठाधीश्वर ब्रम्हलीन जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थें।उन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम में दो बार कठोर करावास की सजा झेली व अकेले के दम पर एक पूरा गांव अंग्रेजों से खाली करा दिया था।अंग्रेज उन्हें क्रांतिकारी साधु के नाम से पहचानते थे।चौदह वर्ष की अवस्था मे सन्यास ग्रहण करने के पश्चात ब्रम्हलीन द्विपीठाधीश्वर स्वरूपानंद जी महाराज अपना पूरा जीवन सनातनधर्म हेतु समर्पित कर दिया था।सनातनधर्म को पुष्ट करने गए हेतु उनके कार्यों का वर्णन करना ऐसे तो हमारे जैसे अल्पज्ञ व साधारण व्यक्ति के बस की बात नही फिर भी पूज्यपाद ब्रम्हलीन महाराज जी द्वारा सनातनधर्म के संवर्धन हेतु किये गए कुछ कार्यों पर प्रकाश डालने का मैं गिलहरी प्रयास कर रहा हूँ👇

चौदह वर्ष की अवस्था मे सन्यास ग्रहण कर सम्पूर्ण जीवन सनातनधर्म को समर्पित करने वाले स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी पूज्यपाद ब्रम्हलीन द्विपीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने राजीव गांधी से कहकर राम मंदिर का ताला खुलवाया और राम मंदिर हेतु रामालय ट्रस्ट का गठन करके राष्ट्र के समस्त धर्माचार्यों को एक मंच पर लाकर राम मंदिर हेतु ऐतिहासिक संघर्ष किया।अपने अधिवक्ता श्री पी.एन. मिश्रा के माध्यम से राम जन्म भूमि व राम मंदिर का मुकदमा लड़कर व वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती से अकाट्य गवाही दिलवाकर राम जन्मभूमि व राम मंदिर का फैसला हिंदुओं के पक्ष में करवाया।राम जन्मभूमि व राम मंदिर का फैसला करने वाले जज ने एक विशेष टिप्पणी कर कहा था कि यह फैसला हम स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के गवाही के आलोक में कर रहे हैं।

रामसेतु को टूटने से बचाने हेतु ब्रम्हलीन द्विपीठाधीश्वर जी महाराज ने कठिन संघर्ष किया।राष्ट्र के समस्त धर्माचार्यों को दिल्ली के जंतर मंतर में एकत्र कर ऐतिहासिक धर्मसभा का आयोजन किया।जिसमें सभी शंकराचार्यों सहित सभी प्रमुख धर्माचार्य व धर्मप्राण सनातनी जनसमुदाय उपस्थित था।उसी समय काशी में भी रामसेतु बचाओ आंदोलन चल रहा था।जिस कार्यक्रम में हमें भी सम्मलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।उसी समय से हम वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर जी महाराज की सेवा में अनवरत लगे हुए हैं।

ब्रम्हलीन द्विपीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के ईक्षा व आदेश से गंगा जी को राष्ट्रीय नदी घोषित कराने हेतु राष्ट्रव्यापी ऐतिहासिक धर्मान्दोलन की बिगुल फूंका गया।जिसकी कमान वर्तमान परमाराध्य परमधर्माधीश अनंतश्रीविभूषित ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज ने संभाली।उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।गंगा जी को राष्ट्रीय नदी घोषित कराने हेतु एक गंगा तपस्वी अनशन पर बैठता सर्वप्रथम वो अन्न का त्याग कर सिर्फ फल व जल ग्रहण करता।फिर कुछ दिनों बाद फल का भी परित्याग कर सिर्फ जल ग्रहण करता और कुछ दिनों बाद जल का भी परित्याग कर देता और जब कुछ दिनों बाद उस गंगा तपस्वी के प्राणों पर जब संकट उपस्थित होता तो प्रशासन जबरिया उसको उठाकर अस्पताल में भर्ती करा देता,प्रशासन जब एक गंगा तपस्वी को जबरिया अस्पताल में भर्ती कराता तब तक उसके स्थान पर दूसरा गंगा तपस्वी अन्न का परित्याग कर अनशन पर बैठ जाता यह क्रम कई महीनों तक चला पूरे राष्ट्र में गंगा जी हेतु किये जा रहे इस आंदोलन को अपार समर्थन मिलने लगा।इसी आदोंलन में गंगा जी को राष्ट्रीय नदी घोषित कराने हेतु अनशन करते हुए बाबा नागनाथ व गंगा प्रेमी जी ने अपना प्राण त्याग दिया।इसी माँ गंगा के आंदोलन में टिहरी पर बांध बंधते समय सम्मलित रहे प्रो.जीडी अग्रवाल ने गंगा माँ का खुद को दोषी मानते हुए आत्मग्लानि से भरकर प्रयाश्चित करने के भाव से वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर जी महाराज से सन्यास दीक्षा ग्रहण कर प्रो.जीडी अग्रवाल से स्वामी सानंद बन गए और उन्होंने भी गंगा को अविरल बनाने की मांग को लेकर अनशन करते हुए अपना प्राण त्याग दिया था।गंगा आंदोलन इतना जोर पकड़ लिया था और राष्ट्र में इतना अपार समर्थन मिलने लगा कि अंत मे सरकार को झुकना ही पड़ा व अनेकों बलिदान के पश्चात माता गंगा राष्ट्रीय नदी घोषित हुई।

धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज जब दिल्ली में गौरक्षा आंदोलन किये थे।उस समय उस आंदोलन में द्विपीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज में मुख्य भूमिका का निर्वहन किया था उस आंदोलन में ब्रम्हलीन गोवर्धन पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य निरंजन देव तीर्थ जी महाराज भी उपस्थित थे।

धरती पर 74 चातुर्मास व्रत अनुष्ठान पूर्ण करने वाले एक मात्र संत थे पूज्यपाद ब्रम्हलीन द्विपीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज।

धर्मान्तरण के विरुद्ध भी मिल का पत्थर स्थापित किया था पूज्यपाद स्वरूपानंद जी महाराज ने।केवल झारखण्ड के पश्चिमसिंह भूम जिले में धर्मान्तरण कर चुके 35 हजार लोगों को गंगा जल से संकल्प दिलाकर व तुलसी का माला पहनाकर वापस सनातनधर्म में लाये व करीब करीब धर्मान्तरण को झारखण्ड में रुकवा दिया था।छत्तीसगढ़ सहित अनेकों प्रदेशों में लाखों लोगों को स्वरूपानंद जी महाराज वापस सनातनधर्म में लाये व आजीवन धर्मान्तरण के विरुद्ध लड़ते रहे।

पूज्यपाद ब्रम्हलीन द्विपीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज की कृपा से राष्ट्र में अनेकों निःशुल्क चिकित्सालय,वेद विद्यालय,वृद्धाश्रम सहित अनेकों प्रकल्प चलते हैं।जो निःस्वार्थ भाव से सनातनधर्मियों की सेवा करते हैं।साथ ही राष्ट्र में ब्रम्हलीन स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज की कृपा से सैकड़ों मठ,मंदिरों व आश्रमों से सनातनधर्मियों की हर सम्भव मदद की जाती है।ब्रम्हलीन द्विपीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा शरू किये गए अधितकतर धर्मन्दोलनों का कमान वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज ने ही सम्भला व उनके दिव्य मार्गदर्शन में शुरू किया गया हर धर्मान्दोलन ने सफलता का वरण किया।

पूज्यपाद ब्रम्हलीन स्वरूपानंद जी महाराज आजीवन सनातनधर्म को पुष्ट करने हेतु कार्य करते रहे इसलिए वो कुछ विधर्मियों व अधर्मियों के आंख में हमेशा खटकते रहे लेकिन उनके विराट व्यक्तिव के समक्ष जब वही विधर्मी व अधर्मी सामने पड़ते तो नतमस्तक हो जाते थे।आजीवन उनके ऊपर कोई और आरोप न लगा पाने और कोई कमी न खोज पाने वाले अधर्मी उनपर कांग्रेसी होने का झूठा आरोप लगाते थे।जबकि आजीवन उन्होंने कभी किसी भी राजनैतिक विचारधारा का समर्थन उन्होंने नही किया।ये अलग बात है कि समस्त राजनैतिक दलों के सनातनधर्मी उनके अनन्य भक्त रहे हैं।

पूज्यपाद ब्रम्हलीन स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का शिवलिंकार मुख देखकर पापियों का पाप नष्ट हो जाता था।ऐसे अद्भुत सनातनधर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु ब्रम्हलीन द्विपीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज का भाद्रपद शुक्ल तृतिया तदानुसार 18 सितम्बर को 100वां जयंती हैं और अश्विन कृष्ण द्वितीया को उनका वार्षिक समाराधना अनुष्ठान है।साथ ही इसी दिन वर्तमान परमाराध्य परमधर्माधीश अनंतश्रीविभूषित ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज एवं पूज्यपाद द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज का पट्टभिषेक दिवस भी है।

वैसे तो हमारी आने वाली पीढियां भी सदैव स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज की सदैव ऋणी रहेंगी।आइए हम सब अपने ऐसे अद्भुत सर्वोच्च धर्मगुरु स्वरूपानंद जी महाराज के प्रति ऐसे श्रद्धा निवेदित करें कि सारा विश्व देखे की एक ऐसे संत जिन्होंने अपना पूरा जीवन सनातनधर्म को समर्पित कर दिया उनका सनातनधर्मियों के जीवन मे क्या स्थान है।।

हमारे जैसे अल्पज्ञ ने अपने इस लेख के माध्यम से सूर्य को दीपक दिखलाने का प्रयास किया है।अगर इस लेख में कोई त्रुटि हो तो उसके निमित्त हम खेद व्यक्त करते हैं।

श्रीगुरुचरणानुरागी #संजयपाण्डेय #मीडियाप्रभारी #ज्योतिष्पीठाधीश्वर #जगदगुरुशंकराचार्य #जीमहाराज!!

~ संजय पाण्डेय जी के वाल से

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