जगतगुरु शंकराचार्य जी की वार्षिक समराधना मनाई इतिहास में पहली बार ऐसा नजारा देखने को मिला ।
गोटेगांव परमहंसी गंगा आश्रम में परम पूज्य ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य जी महाराज की वार्षिक समराधना दोनों पीठों के शंकराचार्य, द्वारका शारदा पीठाधीश्वर सदानन्द सरस्वती जी महाराज ज्योतिष पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्यअविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’, के सानिध्य में संपन्न की गईजिसमें सुबह सर्वप्रथम दोनों पीठों के शंकराचार्य ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य जी की समाधि पर पहुंचे, वहां पर पूजन अर्चन कर, ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी महाराज का आशीर्वाद लिया उसके उपरांत ज्योतिष पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य जी महाराज मेला ग्राउंड स्थित पंडाल पर सुबह 9:00 बजे पहुंचे जहां पर वार्षिक समाराधना में पधारे सभी ब्राह्मणो से मुलाकात की, बाहर से पधारे, ब्राह्मणों के द्वारा, समाराधना पूजन प्रारंभ की गई वहीं बीच-बीच में व्याख्यान माला के क्रम में विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किये
इतिहास में पहली बार ऐसा नजारा देखने को मिला जहां एक साथ1616 ब्राह्मणों ने पूजन किया
इतिहास में पहली बार शायद गोटेगांव क्षेत्र के आसपास के लोगों ने इतना बड़ा कार्यक्रम देखा होगा,जहां पर दोनों पीठों के शंकराचार्य सहित ,1616 ब्राह्मण एक साथ,समराधना पूजन कर,ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी महाराज को श्रद्धांजलि दी कहने को तो 1616 ब्राह्मण थे ,मगर लगभग3000 के ऊपर,ब्राह्मणों ने भोजन प्रसादी ग्रहण की,सभी ब्राह्मणों को पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के द्वारा भोजन उपरांत दक्षिण प्रदान की गई,
शाम 4:00 बजे मंच पहुंचे जगतगुरु शंकराचार्य जी महाराज
दोनों पीठों के शंकराचार्य महाराज,शाम 4:00 बजे मेला प्रांगण स्थित मंच पर पहुंचे जहां पर ,ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी महाराज के तेल चित्र का पूजन कर,मंचीय् कार्यक्रम प्रारंभ किया गया,जिसमें बाहर से आए भजन गायको ने भजन गाये,एवं दशावतार नृत्य का हुआ प्रदर्शन,वही शंकराचार्य सेवा सम्मान से लोगों का हुआ सम्मान चातुर्मास सेवा सम्मान भी दिया गया
पूज्य द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य सदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने उद्बोधन मेंअसली शंकराचार्य एवं नकली शंकराचार्य के बारे में जानकारी दी,कहा कि देश में अनगिनत नकली शंकराचार्य घूम रहे हैंहमें उनसे सावधान रहना चाहिए जो योग्य है जो सच में शंकराचार्य हैं हमें उनका सानिध्य प्राप्त करना चाहिए गुरु शिष्य के बारे में बताया कि,शिष्य वह होता है जो गुरु को अपनी आत्मा मान ले,गुरु के ही बारे में चिंतन करें ,उसे शिष्य कहते हैं
मंच पर प्रमुख रूप से अग्निपीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर रामाकृष्णानन्द जी शंकराचार्य जी महाराज के निजी सचिव चातुर्मास्य समारोह समिति के अध्यक्ष *ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी, ज्योतिष्पीठ पण्डित आचार्य रविशंकर द्विवेदी शास्त्री जी ज्योतिष पीठ शास्त्री पं राजेन्द्र शास्त्री जी, दंडी स्वामी श्री अम्बरीशानन्द जी महाराज,ब्रह्मचारी,आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। मंच पर प्रमुख रूप से पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी महाराज की पूर्णाभिषिक्त शिष्या साध्वी पूर्णाम्बा एवं साध्वी शारदाम्बा,परमहंसी गंगा आश्रम व्यवस्थापक सुंदर पांडे, ब्रह्मचारी मुकुंदानंद जी ब्रह्मचारी राघवानंद जी ब्रह्मचारी, परमात्मा नंद जी उपस्थित रहे मंच का संयोजन *श्री अरविन्द मिश्रएवं संचालन,राजकुमार तिवारी ने किया ।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रम्हचारी विमलानंद जी, पंडित आनंद तिवारी जगद्गुरुकुलम् संस्कृत विद्यापीठ के प्रधानाचार्य , पद्मनाभधर् द्विवेदी, उप प्रधानाध्यापक शारदानंद द्विवेदी सोहन तिवारी माधव शर्मा रघुवीर प्रसाद तिवारी राजकुमार तिवारी,दीपक शुक्ला,अमित तिवारी,पुरसोत्तम तिवारी आशीष तिवारी ,विवेक तंखा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ,दिनेश राय मुनमुन नारायण तिवारी टिंकू अग्रवाल, लक्ष्मी नारायण तिवारी बद्री चौकसे,नारायण गुप्ता , अरविंद पटैल, अजय विश्कर्मा,सत्येंद्र मेहरा,,मनोज यादव,कपिल नायक सहित श्री मद भागवत पुराण का रस पान करने बड़ी संख्या में गुरु भक्तों की उपस्थिति रही सभी ने कथा का रसपान कर अपने मानव जीवन को धन्य बनाया भागवत भगवान की कथा आरती के उपरांत महाभोग प्रसाद का वितरण किया गया | – साभार फेसबुक





शत्-शत् वन्दन नमन 🙏


