सारा जीवन स्वार्थ हेतु जीने वाले व जातियों को लड़ाने वाले सत्तालोलुप राजनैतिक गिद्ध सनातनधर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु सचल शिव ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य जी महाराज के गौमाता के प्राणों की रक्षा हेतु शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी अभियान के व्यापक असर को देखते हुए बिलबिला उठे हैं।
बिहार : गो-मतदाता
पहले गौभक्तों को गोपाल कहा जाता था।फिर उनको गौरक्षक गुंडा कहा गया।और अब तो हद ही हो गई अधम केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने शंकराचार्य जी महाराज को गंदा आदमी कह डाला और कहा कि महाराज जी से शंकराचार्य का टाइटिल हटा दिया जाना चाहिए।
जगजीतन राम मांझी को बता दें कि शंकराचार्य का पद कोई आरक्षण के खैरात पर नही मिला और न ही चुनाव से मिला है जो पांच साल बाद हट जाएगा।शंकराचार्य का पद पूरे जीवन के तपस्या,त्याग,वेदों शास्त्रों के अप्रतिम ज्ञान,परोपकार व अनेकों कसौटियों में कसने के बाद पूर्वाचार्य के ईक्षा व आदेश से प्राप्त होता है।सनातनधर्मियों के धर्म व अपने धर्मगुरुओं के प्रति आदर के कमी व उदासीनता के चलते अब इन राजनीतिज्ञों का इतना मन बढ़ गया है कि अब वो सनातनधर्म के सबसे बड़े धर्मगुरु पर अभद्र टिप्पणी करने लगे हैं।वही ये अधम नेता मुस्लिम व ईसाई धर्म के छोटे से छोटे धर्मगुरु के सम्मुख दुम हिलाते रहते हैं।और वो भी ऐसी टिप्पणी वो इसलिए कर रहे हैं क्योकि शंकराचार्य जी महाराज गौमाता के प्राणों की रक्षा व उन्हें राष्ट्रमाता घोषित करने हेतु बोल रहे हैं।इसी क्रम में कोई दी कौड़ी की राजद की प्रवक्ता प्रियंका भारती ने चारों शंकराचार्य जी महाराज पर अभद्र टिप्पणी की है और उसके साथ बीजेपी नेता कोई जनार्दन मिश्रा ने भी शंकराचार्य जी महाराज को राजद के तरफ से प्लांटेड होने का आरोप लगाकर अभद्र टिप्पणी की है।
अब बिहार के सनातनधर्मी जनता को साबित करना है कि उनके लिए सर्वदेवमयी गौमाता व सनातनधर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु शंकराचार्य जी महाराज महत्वपूर्ण हैं या सत्तालोलुप नेता।
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[साभार फेसबुक]




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