तीर्थ हमारी सम्पत्ति हैं, इनके मूल रूप में कोई विकृति नही होना चाहिए – ज्योतिष्पीठाधीश्वर शङ्कराचार्य
हिन्दू राष्ट्र का प्रारूप अब तक किसी ने सामने न रखा कि ऐसा होगा उसका स्वरूप तो केवल नामकरण कर देने से क्या लाभ ?
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